सात-आठ साल से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों की पुकार—‘मुख्यमंत्री जी, अब आश्वासन नहीं, स्थायीकरण का फैसला चाहिए’: डॉ. अक्षय कुमार चौधरी
सहरसा। वर्षों तक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की कक्षाओं में जिम्मेदारी निभाने वाले अतिथि सहायक प्राध्यापकों की लड़ाई अब आश्वासन से आगे निर्णायक फैसले की ओर बढ़ रही है। बिहार राज्य अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के आह्वान पर राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय, सहरसा के अतिथि सहायक प्राध्यापक 25 अगस्त को सामूहिक अवकाश लेकर पटना में प्रस्तावित शांतिपूर्ण पैदल मार्च में शामिल होंगे।
महाविद्यालय के अतिथि शिक्षकों ने प्रधानाचार्य से मिलकर सामूहिक अवकाश और पटना मार्च में भागीदारी की जानकारी दी। शिक्षकों का कहना है कि सात-आठ वर्षों की लगातार सेवा के बाद भी भविष्य अनिश्चित है। विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर विभागों और अंगीभूत महाविद्यालयों में शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद स्थायी सेवा को लेकर अब तक ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
‘जब विपक्ष में थे, तब आवाज हमारी थी…’
महाविद्यालय अतिथि शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अक्षय कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधे हस्तक्षेप की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब सम्राट चौधरी विपक्ष में थे, तब अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित करने की मांग के समर्थन में विधानसभा के मुख्य द्वार पर बैनर के साथ खड़े हुए थे।
उन्होंने कहा—“तब आप हमारी आवाज के साथ खड़े थे। अब तो आप स्वयं मुख्यमंत्री हैं। वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने का निर्णायक अवसर आपके सामने है।”
डॉ. चौधरी ने सरकार से अतिथि शिक्षकों की सेवा को मूल वेतनमान पर स्थायी करने की दिशा में ठोस पहल की मांग की।
65 वर्ष तक सेवा की अनुशंसा, अब सरकारी फैसले का इंतजार
अतिथि शिक्षकों ने कहा कि विधान परिषद की शिक्षा समिति द्वारा कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवा अवधि 65 वर्ष तक करने की अनुशंसा की जा चुकी है। इसके बावजूद अंतिम निर्णय नहीं होने से शिक्षकों में निराशा है। पटना के गर्दनीबाग में पिछले करीब 15 दिनों से सेवा स्थायीकरण की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है।
संघ के प्रवक्ता डॉ. सुमंत कुमार यादव ने कहा कि अतिथि शिक्षक वर्षों से महाविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। सरकार को उनकी सेवा को कम से कम 65 वर्ष तक सुरक्षित करने की दिशा में तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि 25 अगस्त का सामूहिक अवकाश केवल एक कार्यक्रम में भागीदारी नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मांग के प्रति शिक्षकों की सामूहिक प्रतिबद्धता का संकेत है।
सहरसा से पटना तक उठेगी एक ही आवाज
मार्च में शामिल होने वाले अतिथि सहायक प्राध्यापकों में डॉ. आलोक कुमार झा, डॉ. किरण कुमारी, डॉ. डेजी कुमारी, डॉ. सुदीप कुमार झा, डॉ. पिंकी कुमारी, डॉ. बिल्लो राम, प्रियदर्शनी, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. आलोक कुमार मिश्रा, डॉ. पंकज कुमार यादव, डॉ. निशित रंजन, डॉ. सुमंत राव, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, डॉ. प्रशांत कुमार मनोज, डॉ. नबीबुल इस्लाम, डॉ. कृष्ण कुमार यादव, डॉ. सुप्रिया कश्यप, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ. सुरेश प्रियदर्शी, डॉ. रूद्र किंकर वर्मा, डॉ. कमलाकांत झा, डॉ. हनी सिन्हा, डॉ. धनंजय कुमार सिंह, डॉ. संजय कुमार, डॉ. रूपक कुमारी, डॉ. विकास कुमार, डॉ. मनीष रंजन सैनी, डॉ. सुरुचि चंद्रा, डॉ. गौतम कुमार, डॉ. लक्ष्मण कुमार, डॉ. अब्दुल सत्तार, डॉ. सोनी कुमारी, डॉ. असरारुल हक, डॉ. कोमल गुप्ता, डॉ. बिट्टू कुमार मिश्रा, डॉ. आनंद कुमार मिश्रा, डॉ. रोशन कुमार यादव, डॉ. अनिल कुमार एवं श्री सौरभ कुमार पांडेय शामिल हैं।
अब सवाल सीधा है
विपक्ष में समर्थन मिला था, सत्ता में फैसला कब?
सात-आठ साल की सेवा के बाद स्थायित्व कब?
65 वर्ष तक सेवा की अनुशंसा के बाद निर्णय कब?
अतिथि शिक्षकों की एक ही मांग—आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान।






