कक्षा-6 के छात्र की गर्दन पर प्रहार और कॉलर पकड़ने का आरोप, प्राचार्य के खिलाफ निदेशक को शिकायत; डीएम-डीईओ तक पहुंचा मामला

अररिया। जिले में स्कूलों में बच्चों के साथ कथित हिंसक व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फारबिसगंज छुआपट्टी स्थित शिशु भारती में चौथी कक्षा के छात्र हर्षित केशव की शिक्षक द्वारा कथित पिटाई का मामला अभी सुर्खियों में है। इसी बीच अररिया आरएस स्थित मोहिनी देवी मेमोरियल स्कूल में प्राचार्य पर ही कक्षा-6 के छात्र के साथ कथित मारपीट का गंभीर आरोप सामने आया है। मामला अब स्कूल प्रबंधन की चौखट से निकलकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग तक पहुंच गया है।

स्कूल से लौटा बच्चा रो रहा था, पूछताछ में सामने आया आरोप
मामले को लेकर छात्र के पिता गौरव कुमार ने 21 अगस्त 2026 को स्कूल के निदेशक को लिखित आवेदन दिया है। आवेदन के अनुसार उनका पुत्र आरुष मिश्रा, कक्षा-6, सेक्शन SKY, क्रमांक-4 का छात्र है।
अभिभावक के मुताबिक 21 अगस्त को स्कूल से लौटने के बाद आरुष काफी रो रहा था। मां के पूछने पर उसने कथित तौर पर बताया कि छुट्टी के बाद वह बस की ओर जा रहा था। इसी दौरान आगे जा रहे प्राचार्य ने कथित रूप से बिना किसी कारण उसकी गर्दन पर जोरदार प्रहार किया और कॉलर खींचकर जल्दी निकलने के लिए निर्देशित किया।

‘अनुशासन’ के नाम पर हिंसा का आरोप, अभिभावक ने मांगी कार्रवाई
अभिभावक ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि इस घटना से छात्र को मानसिक एवं शारीरिक क्षति पहुंची। आवेदन में बच्चे को विद्यालय की शैक्षणिक एवं पाठ्येतर गतिविधियों में उत्साह से भाग लेने वाला छात्र बताते हुए कहा गया है कि इस प्रकार का कथित व्यवहार उसके भविष्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
आवेदन में स्कूल निदेशक से प्राचार्य के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने देने की मांग की गई है। साथ ही कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में कानूनी कदम उठाने की बात भी कही गई है।

निदेशक को आवेदन, डीईओ और डीएम को प्रतिलिपि
मामले में खास बात यह है कि शिकायत केवल स्कूल प्रबंधन तक सीमित नहीं रही। आवेदन की प्रतिलिपि जिला शिक्षा पदाधिकारी, अररिया को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। वहीं जिलाधिकारी, अररिया को भी सादर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रतिलिपि दी गई है।

लगातार दूसरी शिकायत ने बढ़ाई चिंता
जिले में एक स्कूल से छात्र की कथित पिटाई का मामला सामने आने के तुरंत बाद दूसरे प्रमुख शिक्षण संस्थान से ऐसी शिकायत सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। सवाल केवल एक छात्र का नहीं, बल्कि स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा और उनके साथ व्यवहार के तौर-तरीके का है।
आखिर अनुशासन और कथित हिंसा के बीच की सीमा कौन तय करेगा?
क्या स्कूल परिसर में बच्चे के साथ शारीरिक व्यवहार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी?
और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अब मामला डीएम और शिक्षा विभाग तक पहुंच चुका है। ऐसे में अभिभावकों की निगाह इस बात पर है कि शिकायत की जांच कब शुरू होती है और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में प्रशासन क्या एक्शन लेता है।
नोट: प्राचार्य पर लगाए गए आरोप शिकायत में दर्ज अभिभावक के आरोप हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही होगी।