इंतकाल के वक्त नहीं पहुंच सके थे पूर्व केंद्रीय मंत्री; बाद में अररिया आकर दी खिराज-ए-अकीदत, कहा—दुख की घड़ी में परिवार के साथ
सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता, रंजीत यादव की अगुवाई में सीमा पर राष्ट्रीय प्रवक्ता का भव्य स्वागत
अररिया।
संवेदक मरहूम परवेज आलम के असामयिक इंतकाल के बाद रविवार को अररिया पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन सीधे उनके गृह आवास पहुंचे। इंतकाल के समय अररिया नहीं पहुंच पाने के बाद बाद में पहुंचे शाहनवाज हुसैन ने मरहूम परवेज आलम को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ताजियत दी।
उन्होंने कहा कि अपनों को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस मुश्किल वक्त में वे परिवार के साथ हैं। उन्होंने मरहूम की मगफिरत और रूह के सुकून के लिए दुआ करते हुए अल्लाह तआला से उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम और परिवार को सब्र-ए-जमील अता करने की दुआ की।
परवेज के घर पहुंचे भाजपा के दिग्गज
शाहनवाज हुसैन के साथ भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद वहाब, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी नारायण झा, जोकीहाट विधानसभा के पूर्व भाजपा प्रत्याशी रंजीत यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण झा, आरपी कंस्ट्रक्शन के संवेदक राज किशोर सिंह, भाजपा नेता राजा मिश्रा, पूर्व नगर अध्यक्ष रणधीर सिंह, महिला मोर्चा की सुष्मिता ठाकुर, तपन तिवारी,आमोद झा,आलोक कुमार बंटू,एवं गणेश शर्मा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सभी ने मरहूम परवेज आलम को श्रद्धांजलि दी और परिवार के सदस्यों से मिलकर अपनी संवेदना व्यक्त की।
सीमा पर स्वागत, फिर सीधे अररिया
अररिया आगमन के दौरान अररिया-पूर्णिया सीमा स्थित करियात कैंप के समीप जोकीहाट विधानसभा के पूर्व भाजपा प्रत्याशी रंजीत यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने शाहनवाज हुसैन का स्वागत किया।
इस दौरान भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद वहाब भी मौजूद रहे। स्वागत के बाद शाहनवाज हुसैन अररिया पहुंचे।
सर्किट हाउस में सियासी संदेश भी दिया
अररिया पहुंचने के बाद शाहनवाज हुसैन ने सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता की। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर सरकार का पक्ष रखा।
सियासी कार्यक्रम के बाद वे मरहूम परवेज आलम के घर पहुंचे और शोक-संतप्त परिवार के साथ वक्त बिताया।
‘पहले परिवार, फिर कार्यक्रम’—दौरे का मानवीय पक्ष
शाहनवाज हुसैन के दौरे में राजनीतिक गतिविधियों के साथ संवेदना का पक्ष भी प्रमुख रहा। इंतकाल के वक्त अररिया नहीं पहुंच पाने के बाद बाद में पहुंचकर परवेज आलम के घर जाना और परिजनों से मुलाकात करना स्थानीय भाजपा नेताओं के बीच भी चर्चा का विषय रहा।
मां की पुण्यतिथि के लिए सुपौल रवाना
परवेज आलम के परिवार से मुलाकात के बाद शाहनवाज हुसैन अपने काफिले के साथ सुपौल के लिए रवाना हो गए। बताया गया कि 10 अगस्त को उनकी मां की पुण्यतिथि है। इसी सिलसिले में वे सुपौल जा रहे थे।
अररिया दौरे में सियासत भी रही, संवेदना भी—लेकिन परवेज आलम के घर की वह मुलाकात पूरे दौरे का सबसे भावुक पड़ाव बन गई।







